Humko mann ki shakti dena

by Gulzar हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करेंदूसरो की जय से पहले, ख़ुद को जय करें। भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकेंदोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सकेझूठ से बचे रहें, सच का दम भरेंदूसरो की जय से पहले ख़ुद को जय करेंहमको मन की शक्ति देना। मुश्किलें पड़े […]

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Jihal-e-miski

composed by Gulzar जिहाल-ए-मिस्कीं मुकों बा-रंजिश, बहार-ए-हिजरा बेचारा दिल है,सुनाई देती हैं जिसकी धड़कन, तुम्हारा दिल या हमारा दिल है। वो आके पेहलू में ऐसे बैठे, के शाम रंगीन हो गयी हैं,ज़रा ज़रा सी खिली तबियत, ज़रा सी ग़मगीन हो गयी हैं। कभी कभी शाम ऐसे ढलती है जैसे घूंघट उतर रहा है,तुम्हारे सीने से […]

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Mujhko itne se kaam par rakh lou

composed by Gulzar मुझको इतने से काम पे रख लो…जब भी सीने पे झूलता लॉकेटउल्टा हो जाए तो मैं हाथों सेसीधा करता रहूँ उसको मुझको इतने से काम पे रख लो… जब भी आवेज़ा उलझे बालों मेंमुस्कुराके बस इतना सा कह दोआह चुभता है ये अलग कर दो मुझको इतने से काम पे रख लो…. […]

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Na jaane kya tha, jo kehna tha

Composed by Gulzar न जाने क्या था, जो कहना थाआज मिल के तुझेतुझे मिला था मगर, जाने क्या कहा मैंने वो एक बात जो सोची थी तुझसे कह दूँगातुझे मिला तो लगा, वो भी कह चुका हूँ कभीजाने क्या, ना जाने क्या थाजो कहना था आज मिल के तुझे कुछ ऐसी बातें जो तुझसे कही […]

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Haanth chootey bhi toh

composed by Gulzar हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करतेवक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकनऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ाजाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते लग के साहिल से जो बहता है […]

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Mujhko bhi tarqeeb sikha de

composed by Gulzar मुझको भी तरकीब सिखा दे यार जुलाहेअकसर तुझको देखा है कि ताना बुनतेजब कोई तागा टूट गया या ख़त्म हुआफिर से बाँध केऔर सिरा कोई जोड़ के उसमेंआगे बुनने लगते होतेरे इस ताने में लेकिनइक भी गाँठ गिरह बुन्तर कीदेख नहीं सकता कोईमैंने तो एक बार बुना था एक ही रिश्तालेकिन उसकी […]

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Raat chup-chap dabey paav

composed by Gulzar रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती हैरात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहींकांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता हैख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता हैचाँद की किरणों में वो रोज़ सा रेशम भी नहींचाँद की चिकनी डली है कि घुली जाती हैऔर सन्नाटों की इक धूल सी उड़ी जाती […]

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